प्राचार्य की कलम से...

अम्बागढ़ चैकी आदिवासी अंचल में स्थित एवं प्राकृतिक घटाओं से आच्छादित प्रकृति की गोद में बसा हुआ एक छोटा सा नगर है । अम्बागढ़ चैकी में महाविद्यालय की स्थापना 1 जुलाई 1970 को हुई थी । जुलाई 1973 को महाविद्यालय का शासकीयकरण हुआ । इस महाविद्यालय का नाम भुमि दानदाता राजा लाल चक्रधर शाह के नाम पर रखा गया है। प्रारंभ में इस महाविद्यिालय में कला संकाय की कक्षायें संचालित होती थी । शिक्षा के विकास के साथ-साथ धीरे-धीरे छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ती गई नये विषय एवं अन्य संकाय भी संचालित हुए । इस महाविद्यालय में कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाल संचालित है । इनेक विषयों में एम.ए. एवं विज्ञान संकाय में एम.एस.सी. की कक्षायें संचालित है। एन.एस.एस. एवं एन.सी.सी. की इकाईयों में जुडकर विद्यार्थी राष्ट्रीय सेवा के लिए समर्पित भावना से कार्य कर रहे है। शारीरिक स्वच्छता के लिए एवं मानसिक विकास के लिए खेल विभाग छात्र-छात्राओं को प्रेरणा देता है एवं खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। समृद्ध ग्रन्थालय विद्यार्थियों को विद्वता की ओर बढ़ाने में सहायक है। यह महाविद्यालय नैक(छ।।ब्) की कसौटी पर खरा उतरने का पूरा प्रसास कर रहा है। (NAAC) के द्वारा (सितंबर 2004) C+ की श्रेणी प्रदान की गई है। महाविद्यालय अभावों को दूर करता हुआ यह छात्र-छात्राओं के विकास के लिए हमेशा प्रयासरत् रहेगा। लाल चक्रधर शाह महाविद्यालय विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ वातावरण एवं भययुक्त वातावरण तथा शैक्षणिक वातावरण बनाये जाने के लिए पूरी तरह संकल्पित है, जिससे छात्र-छात्रायें अपना शैक्षणिक विकास पूरी लगन और मेहनत से कर सकें।

प्राचार्य

डॉ. श्रीमति बी.एन. मेश्राम